"सर्व शुभ में स्व शुभ समाया हुआ है।" 🌿
आज इसी वाक्य पर चर्चा हो रही थी, और यह मन में गहराई तक उतर गया।
मेरे लिए इसका अर्थ है—जब हमारी सोच, कर्म और निर्णय केवल अपने लिए नहीं, बल्कि सबके शुभ के लिए होते हैं, तब हमारा अपना शुभ भी उसी में समाहित हो जाता है।
आप इस वाक्य को कैसे समझते हैं? आपके लिए इसका क्या अर्थ है?